पार्थसारथी राजगोपालाचारी

पार्थसारथी राजगोपालाचारी

सतखोल आश्रम , हिमालय
वायलूर (तिरुचिरापल्ली के पास), तमिलनाडु, भारत

Divine Journey & Teachings

पार्थसारथी राजगोपालाचारी 

परिचय

पार्थसारथी राजगोपालाचारी (24 जुलाई 1927 – 20 दिसंबर 2014), जिन्हें चरीजि (Chariji) के नाम से भी जाना जाता है, Shri Ram Chandra Mission की सहज मार्ग आध्यात्मिक परंपरा में राजयोग के तीसरे आचार्य (गुरु) थे।

वे एक महान आध्यात्मिक मार्गदर्शक, लेखक और गुरु थे, जिन्होंने सहज मार्ग (Sahaj Marg) प्रणाली के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

व्यक्तिगत जीवन

जन्म

  • जन्म: 24 जुलाई 1927
  • जन्म स्थान: वायलूर (तिरुचिरापल्ली के पास), तमिलनाडु, भारत

मृत्यु

  • मृत्यु: 20 दिसंबर 2014

परिवार

  • पिता: सी. ए. राजगोपालाचारी (भारतीय रेलवे में कार्यरत)
  • माता: आर. जानकी (शौकिया वायलिन वादक)
  • भाई: कोठंडरामन, श्रीनिवासन (सीना)
  • बहन: वसंत
  • पत्नी: सुलोचना राजगोपालाचारी
  • संतान: पी. आर. कृष्ण

धार्मिक एवं आध्यात्मिक जीवन

  • संस्था: Shri Ram Chandra Mission
  • पद: अध्यक्ष (1983–2014)
  • संस्थापक:
    • Sahaj Marg Spirituality Foundation (2003)
    • Lalaji Memorial Omega International School (2005)

वे सहज मार्ग साधना प्रणाली के प्रमुख प्रचारक थे और आध्यात्मिक विकास में गुरु की भूमिका पर विशेष बल देते थे।

प्रारंभिक जीवन

चरीजि का जन्म एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुआ। वे चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनकी माता का निधन तब हो गया जब वे केवल पाँच वर्ष के थे, जिससे उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

शिक्षा 

उन्होंने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से विज्ञान (B.Sc.) में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की।

उस समय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन विश्वविद्यालय के कुलपति थे।

उन्होंने U.O.T.C. (University Officers' Training Corps) में भी भाग लिया और एक कैडेट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

पारिवारिक जीवन

चरीजि का विवाह सुलोचना जी से हुआ था। उनके एक पुत्र पी. आर. कृष्ण हैं।

व्यावसायिक जीवन 

अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने:

  • Indian Plastics Ltd.
  • T.T. Krishnamachari & Co.

जैसी कंपनियों में कार्य किया।

वे बाद में TTK समूह में कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद से 1985 में सेवानिवृत्त हुए।

प्रमुख कृतियाँ 

चरीजि ने अनेक आध्यात्मिक और दार्शनिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • My Master
  • Yatra: India in the West & Sahaj Marg in Europe
  • Heart to Heart (5 खंड)
  • Down Memory Lane (2 खंड)
  • In His Footsteps (4 खंड)
  • Spider’s Web (3 खंड)
  • What is Sahaj Marg?
  • Religion and Spirituality
  • Love and Death
  • Guru and The Goal
  • HeartSpeak Series (14 खंड)
  • Diaries of Chariji (1983–1985)
  • वे कहते हैं (हिंदी में 4 खंड)

सहज मार्ग और आध्यात्मिक जीवन 

1964 में चरीजि ने श्री राम चंद्र (शाहजहांपुर) (बाबूजी) से भेंट की और उनके शिष्य बने। बाबूजी Shri Ram Chandra Mission के संस्थापक अध्यक्ष थे।

जब बाबूजी का स्वास्थ्य धीरे-धीरे कमजोर होने लगा, तब उन्होंने चरीजि को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। 1983 में बाबूजी के निधन के बाद चरीजि श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष बने और सहज मार्ग परंपरा में राजयोग के तीसरे आचार्य के रूप में स्थापित हुए।

उन्होंने सहज मार्ग के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसे 100 से अधिक देशों तक फैलाया। उन्होंने चेन्नई में लालाजी मेमोरियल ओमेगा इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना भी की।

चरीजि ने 2008 तक पूरे विश्व में यात्रा की और राजयोग पर व्याख्यान एवं सेमिनार आयोजित किए, जिससे हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

अंतिम वर्ष और मृत्यु 

जुलाई 2012 से चरीजि का स्वास्थ्य गिरने लगा। अंततः 20 दिसंबर 2014 को उन्होंने महासमाधि प्राप्त की।

उनके पश्चात कमलेश पटेल (दाजी) को Shri Ram Chandra Mission का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

Reference Wikipedia