जन्म: नारायण ठोसर
लगभग 1608
जांब, अहमदनगर सल्तनत
(वर्तमान जलना जिला, महाराष्ट्र, भारत)
मृत्यु: 1682 (आयु लगभग 73–74 वर्ष)
सज्जनगढ़, सतारा, मराठा साम्राज्य
धर्म: हिंदू धर्म
संप्रदाय: समर्थ संप्रदाय
दर्शन: भक्ति योग, वैष्णव धर्म
समर्थ रामदास (c. 1608 – c. 1682), जिन्हें रामदास स्वामी के नाम से भी जाना जाता है, एक महान भारतीय संत, दार्शनिक, कवि और आध्यात्मिक गुरु थे।
वे भगवान राम और हनुमान के परम भक्त थे।
समर्थ रामदास का जन्म 1608 में राम नवमी के दिन महाराष्ट्र के जांब गाँव में हुआ था।
उनका जन्म एक मराठी देशस्थ ऋग्वेदी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
उनके माता-पिता थे—
उनका एक बड़ा भाई था, जिसका नाम गंगाधर था।
उनके पिता सूर्यदेव के भक्त थे, लेकिन 1615–1616 के आसपास उनके पिता का निधन हो गया।
इसके बाद रामदास का स्वभाव अंतर्मुखी (introvert) हो गया और वे अक्सर ईश्वर के चिंतन में लीन रहते थे।
किंवदंती के अनुसार—
जब वे 12 वर्ष के थे, तब विवाह के समय एक पंडित द्वारा “सावधान!” शब्द सुनकर उन्होंने विवाह मंडप छोड़ दिया और वहाँ से भाग गए।
इसके बाद वे गोदावरी नदी के किनारे-किनारे चलते हुए पंचवटी (नासिक के पास) पहुँचे।
फिर वे ताकली नामक स्थान पर गए, जहाँ—
👉 उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की
👉 भगवान राम की भक्ति में लीन रहे
इस दौरान—
माना जाता है कि उन्होंने 24 वर्ष की आयु में आत्मज्ञान (Enlightenment) प्राप्त किया।
इसके बाद उन्होंने “रामदास” नाम धारण किया।
उन्होंने ताकली में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की।
तपस्या के बाद उन्होंने पूरे भारत में यात्रा की।
👉 उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक भारत भ्रमण किया
👉 समाज की स्थिति का अध्ययन किया
उन्होंने अपने अनुभवों को दो प्रमुख ग्रंथों में लिखा—
इन ग्रंथों में उस समय के समाज की स्थिति का वर्णन मिलता है।
उन्होंने हिमालय क्षेत्र की भी यात्रा की और श्रीनगर में सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोबिंद से मुलाकात की।
यात्रा के बाद वे महाबलेश्वर (सतारा के पास) लौटे।
फिर मसूर में उन्होंने राम नवमी उत्सव का आयोजन किया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।
समर्थ रामदास ने अपने जीवन में कई मठ (मठ/आश्रम) स्थापित किए।
👉 अनुमान है कि उन्होंने 700 से 1100 के बीच मठ स्थापित किए
हालाँकि, कुछ विद्वानों के अनुसार यह संख्या कम भी हो सकती है।
लगभग 1648 में उन्होंने सतारा के पास चाफल गाँव में भगवान राम का मंदिर बनवाया और वहाँ मूर्ति स्थापित की।
उन्होंने दक्षिण महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में 11 हनुमान मंदिर स्थापित किए, जिन्हें—
👉 “11 मारुति मंदिर”
के नाम से जाना जाता है।
समर्थ रामदास का जीवन—
का अद्भुत उदाहरण है।
उन्होंने भगवान राम और हनुमान की भक्ति के माध्यम से समाज को एकजुट किया और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार किया।
Reference Wikipedia