जन्म नाम: श्यामा चरण लाहिड़ी
जन्म: 30 सितम्बर 1828
घूर्णी गाँव, नदिया जिला, बंगाल प्रेसीडेंसी (वर्तमान पश्चिम बंगाल, भारत)
मृत्यु: 26 सितम्बर 1895 (आयु 66 वर्ष)
बनारस (वाराणसी), उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीयता: भारतीय
सम्मान: योगीराज, काशी बाबा
धर्म: हिन्दू धर्म
दर्शन: योग
संप्रदाय: क्रिया योग
गुरु: महावतार बाबाजी
श्यामा चरण लाहिड़ी (30 सितम्बर 1828 – 26 सितम्बर 1895), जिन्हें लाहिड़ी महाशय के नाम से जाना जाता है, एक महान भारतीय योगी और गुरु थे।
उन्होंने क्रिया योग की शिक्षा का प्रसार किया और इसे जनसाधारण तक पहुँचाया।
वे महावतार बाबाजी के शिष्य थे।
उनका जीवन परमहंस योगानंद की प्रसिद्ध पुस्तक “योगी कथामृत (Autobiography of a Yogi)” में विस्तार से वर्णित है।
लाहिड़ी महाशय का जन्म बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
पिता: गौरमोहन लाहिड़ी
माता: मुक्तकेशी लाहिड़ी
1832 में आई बाढ़ में उनकी माता का निधन हो गया और उनका घर नष्ट हो गया। इसके बाद उनका परिवार वाराणसी चला गया।
वहाँ उन्होंने:
का अध्ययन किया।
1846 में उनका विवाह काशीमणि से हुआ।
उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ना-लिखना भी सिखाया।
1851 में उन्होंने एक क्लर्क और शिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया।
27 नवम्बर 1861 को लाहिड़ी महाशय की मुलाकात रानीखेत के पास पहाड़ों में महावतार बाबाजी से हुई।
बाबाजी ने उन्हें “क्रिया योग” की शिक्षा दी।
इसके बाद लाहिड़ी महाशय ने यह ज्ञान अपने शिष्यों को दिया, जिनमें शामिल थे:
लाहिड़ी महाशय के पास सैकड़ों लोग दीक्षा लेने आते थे।
वे अक्सर अपने शिष्यों के साथ भगवद्गीता पर चर्चा करते थे।
वे:
लेकिन बाद में उन्होंने अपने शिष्यों को कोलकाता में आर्य मिशन बनाने की अनुमति दी, ताकि उनकी शिक्षाओं का प्रसार हो सके।
लाहिड़ी महाशय का निधन 1895 में हुआ।
उनके शिष्यों ने उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाया और उनके प्रवचनों को पुस्तकों में संकलित किया।
लाहिड़ी महाशय का जीवन यह दर्शाता है कि:
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