जन्म नाम: सुब्बाराय
जन्म: 25 अप्रैल 1922
भारत
मृत्यु: 23 नवम्बर 2001 (आयु 79 वर्ष)
शिवानंदनगर, ऋषिकेश
धर्म: हिन्दू धर्म
दर्शन: वेदांत
गुरु: स्वामी शिवानंद सरस्वती
स्वामी कृष्णानंद सरस्वती (25 अप्रैल 1922 – 23 नवम्बर 2001) स्वामी शिवानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य थे।
वे ऋषिकेश स्थित डिवाइन लाइफ सोसाइटी (Divine Life Society) के महासचिव (General Secretary) रहे (1958 से 2001 तक)।
वे एक महान संत, योगी, दार्शनिक और धर्मशास्त्री थे, जिन्होंने योग, धर्म और अध्यात्म पर 40 से अधिक ग्रंथों की रचना की।
स्वामी कृष्णानंद का जन्म कर्नाटक के पुट्टूर में एक पारंपरिक मध्व (शिवल्ली ब्राह्मण) परिवार में हुआ था।
उन्होंने बचपन से ही संस्कृत का अध्ययन किया और शास्त्रों को पढ़ने एवं कंठस्थ करने में दक्षता प्राप्त की।
उनका झुकाव अद्वैत वेदांत दर्शन की ओर था।
वे आध्यात्मिक जीवन और संन्यास की ओर आकर्षित थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें सरकारी नौकरी करने के लिए प्रेरित किया।
1943 में उन्होंने बेल्लारी के होस्पेट सरकारी प्रशिक्षण विद्यालय में कार्य किया, लेकिन वहाँ बीमार पड़ने के बाद वे घर लौट आए।
1944 में उन्होंने घर छोड़ दिया और ऋषिकेश स्थित शिवानंद आश्रम पहुँच गए।
वहाँ उन्होंने:
1947 में उन्होंने अपनी पहली पुस्तक “Realisation of the Absolute” लिखी।
स्वामी कृष्णानंद वेदांत दर्शन, विशेष रूप से अद्वैत वेदांत, के महान विद्वान थे।
उन्होंने पश्चिमी दर्शन का भी अध्ययन किया और दोनों के बीच समन्वय स्थापित किया।
उन्होंने “सिंथेसिस योग” (समन्वित योग) का प्रचार किया, जिसमें चार मुख्य मार्ग शामिल हैं:
स्वामी कृष्णानंद ने अनेक ग्रंथ लिखे, जिनमें प्रमुख हैं:
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