आलवार

आलवार

श्रीरंगम (तमिलनाडु)
श्रीविल्लिपुथुर (तमिलनाडु)

Divine Journey & Teachings

आलवार

व्यक्तिगत जीवन
क्षेत्र: तमिलकम
प्रमुख कृतियाँ: नालयिर दिव्य प्रबंधम
प्रसिद्धि: भक्ति आंदोलन

धार्मिक जीवन
धर्म: हिंदू धर्म
संप्रदाय: वैष्णववाद
दर्शन: विशिष्टाद्वैत
परंपरा: भागवत

धार्मिक जीवन यात्रा
प्रभावित —

वैष्णव परंपरा का भाग

हिंदू धर्म का भाग

आलवार (तमिल: आळवार, अर्थ: “गहराई में डूबे हुए”) दक्षिण भारत के तमिल कवि-संत थे, जिन्होंने भगवान विष्णु के प्रति भक्ति (प्रेम, आनंद और सेवा) को अपने भजनों के माध्यम से व्यक्त किया। उन्हें वैष्णव परंपरा में अत्यंत सम्मान दिया जाता है, जहाँ विष्णु को सर्वोच्च सत्य माना जाता है।

परंपरा के अनुसार आलवारों की संख्या दस मानी जाती है, लेकिन कुछ संदर्भों में आंडाल और मधुरकवि आलवार को भी शामिल किया जाता है, जिससे कुल संख्या बारह हो जाती है।

63 समकालीन शैव नयनार संतों के साथ, ये तमिलनाडु के सबसे महत्वपूर्ण संतों में से एक माने जाते हैं।

आलवारों को श्रीवैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु के बारह महान भक्तों के रूप में माना जाता है, जिन्होंने तमिल भाषी क्षेत्रों में वैष्णव धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आलवारों ने भागवत संप्रदाय और हिंदू धर्म के दो महान महाकाव्यों—रामायण और महाभारत—के प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आलवारों के भजनों को “नालयिर दिव्य प्रबंधम” के रूप में संकलित किया गया है, जिसमें 4000 पद हैं। उनके भजनों में वर्णित 108 मंदिरों को “दिव्य देशम” कहा जाता है।

इन भजनों को 9वीं शताब्दी के वैष्णव आचार्य नाथमुनि (824–924 ई.) ने संकलित किया, जिन्होंने इसे “द्रविड़ वेद” या “तमिल वेद” कहा।

प्रबंधम के भजन दक्षिण भारत के विभिन्न विष्णु मंदिरों में प्रतिदिन और उत्सवों के दौरान गाए जाते हैं।

बारह आलवारों की सूची

पोयगै आलवार
भूतत्तालवार
पेय आलवार
तिरुमलिसै आलवार
नाम्मालवार
मधुरकवि आलवार
कुलशेखर आलवार
पेरियालवार
आंडाल
तोंडरडिप्पोडि आलवार
तिरुप्पान आलवार
तिरुमंगई आलवार

आंडाल एकमात्र महिला आलवार थीं।

शब्दार्थ (Etymology)

“आलवार” शब्द का सटीक अर्थ विवादित रहा है। सामान्यतः यह तमिल शब्द “आळ” (गहराई) से लिया गया माना जाता है, जिसका अर्थ “गहराई में डूबा हुआ” होता है।

इससे यह अर्थ निकाले जाते हैं—
“जो दिव्यता में पूरी तरह डूब गया हो”
“जो गहन ध्यान में लीन हो”
“ईश्वर प्रेम में मग्न संत”

कुछ विद्वानों के अनुसार यह शब्द “आळ्वार” से विकसित हुआ है, जिसका अर्थ “शासन करने वाला” या “स्वामी” भी हो सकता है।

काल निर्धारण (Dating)

परंपरागत रूप से आलवारों को प्राचीन काल का माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार वे द्वापर युग और कलियुग के प्रारंभिक समय में जन्मे थे।

हालांकि आधुनिक विद्वानों के अनुसार आलवार 5वीं से 10वीं शताब्दी के बीच रहे।

कथाएँ और परंपराएँ (Legend and hagiography)

आलवारों से जुड़ी कथाएँ वैष्णव ग्रंथों और लोक परंपराओं पर आधारित हैं, जिनमें ऐतिहासिक तथ्यों के साथ चमत्कारिक घटनाओं का भी वर्णन मिलता है।

इन कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अपने विभिन्न दिव्य आयुधों और प्रतीकों को पृथ्वी पर अवतार लेकर आलवारों के रूप में भेजा।

कई आलवारों का जन्म अलौकिक बताया गया है, जैसे—
पोयगै आलवार का जन्म कमल से
भूतत्तालवार का जन्म फूल से
पेय आलवार का जन्म लाल कमल से

आंडाल को एक फूलों के बगीचे में पाया गया था, जबकि नाम्मालवार को एक इमली के पेड़ के नीचे पाया गया।

प्रमुख कथाएँ

पहले तीन आलवार—पोयगै, भूतत्त और पेय—एक तूफान के दौरान संयोग से मिले, जहाँ भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए।

तिरुमंगई आलवार पहले एक डाकू थे, जो बाद में संत बने।

आंडाल ने भगवान विष्णु/कृष्ण को अपना पति मानकर जीवन बिताया और अंत में श्रीरंगम में भगवान रंगनाथ में लीन हो गईं।

रचनाएँ (Works)

आलवारों की प्रमुख रचनाएँ “नालयिर दिव्य प्रबंधम” में संकलित हैं, जिसमें 4000 पद शामिल हैं।

इनमें प्रमुख रचनाएँ हैं—

तिरुपल्लांडु
पेरियालवार तिरुमोझि
तिरुप्पावै
नाचियार तिरुमोझि
तिरुमालाई
तिरुवायमोझि आदि

दर्शन (Philosophy)

आलवारों की कविताएँ भगवान विष्णु के प्रति गहरी भक्ति को दर्शाती हैं। उनका दर्शन विशिष्टाद्वैत वेदांत पर आधारित है, जिसमें भगवान को सर्वोच्च सत्य माना गया है।

वे मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्ति और पूर्ण समर्पण (प्रपत्ति) को सबसे महत्वपूर्ण मार्ग मानते हैं।

विरासत (Legacy)

आलवारों की भक्ति साहित्य ने वैदिक परंपरा से अलग एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया, जिसमें भक्ति को मोक्ष का मुख्य मार्ग माना गया।

उन्होंने तमिल भाषा में भक्ति साहित्य को लोकप्रिय बनाया और वैष्णव परंपरा को मजबूत किया।

उनकी परंपरा से पाँच प्रमुख वैष्णव संप्रदाय विकसित हुए—रामानुज, मध्व, वल्लभ, निम्बार्क और चैतन्य संप्रदाय।

Reference Wikipidia