जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
व्यक्तिगत जीवन
जन्म नाम: राम कृपालु त्रिपाठी
जन्म: 5 अक्टूबर 1922
मंगरह, प्रतापगढ़, संयुक्त प्रांत, ब्रिटिश भारत (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत)
मृत्यु: 15 नवम्बर 2013 (आयु 91 वर्ष)
नई दिल्ली, भारत
गृह नगर: कृपालु धाम, मंगरह, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)
माता-पिता:
- पिता: ललता प्रसाद त्रिपाठी
- माता: भगवती देवी
प्रमुख कृतियाँ
- प्रेम रस सिद्धांत
- प्रेम रस मदिरा
- श्यामा श्याम गीत
- राधा गोविंद गीत
- ब्रज रस माधुरी (भाग 1–4)
- युगल शतक
- युगल रस
- युगल माधुरी
- भक्ति शतक
- राधा त्रयोदशी
- कृपालु त्रयोदशी
धार्मिक जीवन
धर्म: हिन्दू धर्म
दर्शन: भक्ति योग
धार्मिक करियर
पद:
- वेदमर्ग प्रतिष्ठापन आचार्य
- सनातन वैदिक धर्म प्रतिष्ठापन परमाचार्य
- निखिल दर्शन समन्वयाचार्य
- भक्ति योग रसावतार
- जगद्गुरुत्तम
कार्यकाल: 1957 – 2013
परिचय
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज (5 अक्टूबर 1922 – 15 नवम्बर 2013) एक महान भारतीय आध्यात्मिक गुरु थे।
वे प्रेम मंदिर, वृंदावन के संस्थापक और जगद्गुरु कृपालु परिषद (JKP) के संस्थापक थे, जो एक धार्मिक एवं परोपकारी संगठन है।
जगद्गुरु की उपाधि
14 जनवरी 1957 (मकर संक्रांति) के दिन उन्हें काशी विद्वत परिषद द्वारा “जगद्गुरु” की उपाधि प्रदान की गई।
यह उपाधि प्राप्त करने वाले वे पाँचवें व्यक्ति थे और उस समय उनकी आयु केवल 34 वर्ष थी।
उन्हें अन्य उपाधियाँ भी दी गईं:
- भक्ति योग रसावतार
- समन्वय आचार्य
दार्शनिक विचार
कृपालु जी का दर्शन “जगद्गुरु कृपालु भक्ति योग तत्त्वदर्शन” के नाम से प्रसिद्ध है।
इस दर्शन के अनुसार:
- आत्मा का लक्ष्य परम आनंद प्राप्त करना है
- यह आनंद केवल भगवान में ही मिलता है, भौतिक वस्तुओं में नहीं
- भगवान की कृपा से ही यह संभव है
मुख्य सिद्धांत:
- पूर्ण समर्पण (शरणागति) आवश्यक है
- संसार से वैराग्य आवश्यक है
- भक्ति मार्ग (राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम) सबसे श्रेष्ठ है
भक्ति योग में:
- रूपध्यान (भगवान का ध्यान)
- कर्म करते हुए भी भगवान का स्मरण
महत्वपूर्ण माना गया है।
जीवन और कार्य
1957 में जगद्गुरु बनने के बाद उन्होंने पूरे भारत में व्यापक प्रवचन किए, जिनमें हजारों लोग शामिल होते थे।
उनकी विशेषता थी:
- अद्भुत स्मरण शक्ति
- शास्त्रों का गहरा ज्ञान
- सटीक श्लोकों का उल्लेख
संगठन स्थापना
1970 में उन्होंने जगद्गुरु कृपालु परिषद (JKP) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य उनके आध्यात्मिक विचारों का प्रसार करना था।
भजन और रचनाएँ
उन्होंने हजारों भजन और कीर्तन की रचना की।
उनकी प्रसिद्ध कृति “प्रेम रस मदिरा” में 1008 भक्ति गीत शामिल हैं।
उनकी पुस्तक “प्रेम रस सिद्धांत” में:
- आत्मा का उद्देश्य
- भगवान की कृपा
- गुरु की आवश्यकता
का विस्तृत वर्णन है।
मंदिर
कृपालु जी महाराज ने तीन प्रमुख मंदिरों की स्थापना की:
1. प्रेम मंदिर, वृंदावन
- सफेद संगमरमर से निर्मित
- अत्यंत प्रसिद्ध और भव्य मंदिर
- लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन करते हैं
2. भक्ति मंदिर, मंगरह
- उनके जन्मस्थान पर स्थित
- राधा-कृष्ण और सीता-राम को समर्पित
3. कीर्ति मंदिर, बरसाना
- राधा रानी की माता “कीर्ति मैया” को समर्पित
- विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर
कीर्तन
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा रचित भजन और कीर्तन भक्ति, प्रेम और राधा-कृष्ण लीला पर आधारित हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ इस प्रकार हैं:
प्रमुख कीर्तन संग्रह:
- प्रेम रस मदिरा (ISBN: 978-93-80661-27-8)
→ इसमें राधा-कृष्ण लीला, भक्ति दर्शन और विनम्रता पर आधारित 1008 पद (गीत) शामिल हैं। - ब्रज रस माधुरी
(भाग 1, 2, 3, 4)
→ चार भागों में प्रकाशित, जिसमें राधा-कृष्ण, सीता-राम आदि पर आधारित सैकड़ों कीर्तन शामिल हैं। - युगल शतक (ISBN: 978-93-80661-30-8)
→ राधा रानी और भगवान कृष्ण पर आधारित 100 कीर्तन। - युगल रस (ISBN: 978-93-80661-29-2)
→ राधा-कृष्ण के प्रेम और लीला पर आधारित कीर्तन। - श्री कृष्ण द्वादशी (ISBN: 978-93-80661-04-9)
→ भगवान कृष्ण की सुंदरता और श्रृंगार का वर्णन करने वाले 12 पद। - श्री राधा त्रयोदशी (ISBN: 978-93-80661-28-5)
→ राधा रानी की सुंदरता और श्रृंगार पर आधारित 13 पद।
संगीत में योगदान
कृपालु जी महाराज के भजन और कीर्तन कई प्रसिद्ध गायकों द्वारा गाए गए हैं, जैसे:
- मन्ना डे
- अनुराधा पौडवाल
- अनुप जलोटा
इनकी प्रस्तुतियाँ आज भी भक्ति संगीत में अत्यंत लोकप्रिय हैं।
महिला शिक्षा
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई परोपकारी शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की।
प्रमुख संस्थान:
- कृपालु बालिका प्राथमिक विद्यालय
- कृपालु बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज
- कृपालु महिला महाविद्यालय (डिग्री कॉलेज)
स्थान: कुंडा, प्रतापगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश, भारत
उद्देश्य
इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य है:
- आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग की लड़कियों को शिक्षा देना
- निःशुल्क और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना
- महिलाओं को सशक्त बनाना
Reference Wikipedia