खप्तड़ बाबा

खप्तड़ बाबा

आलोकविद्याश्रम.
कश्मीर, भारत

Divine Journey & Teachings

खप्तड़ बाबा

व्यक्तिगत जीवन

जन्म: कश्मीर, भारत

मृत्यु: 9 मई 1996
पोखरा, नेपाल

अन्य नाम:

  • श्री 1008 ब्रह्मवित् परमहंस योगी सच्चिदानंद सरस्वती
  • खप्तड़ स्वामी

प्रसिद्धि:

  • औषधीय जड़ी-बूटियों, योग, ध्यान और विचार विज्ञान के वैदिक ज्ञान के प्रसार में योगदान

प्रमुख कृतियाँ:

  • The Science of Thought
  • Dharma-Vigyan

परिचय

खप्तड़ बाबा, जिन्हें स्वामी सच्चिदानंद के नाम से भी जाना जाता है, एक महान आध्यात्मिक संत थे।

उन्होंने नेपाल के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण किया और अंततः खप्तड़ घाटी में साधना के लिए स्थायी रूप से निवास किया।

वे हिंदू संत के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजे जाते हैं।

जीवन और साधना

खप्तड़ बाबा 1940 के दशक में नेपाल के विभिन्न स्थानों जैसे:

  • इलाम
  • कालिंचोक
  • स्वर्गद्वारी
  • मुसीकोट
  • चंदननाथ

में भ्रमण करते हुए अंततः खप्तड़ घाटी में बस गए।

उन्होंने लगभग 50 वर्षों तक खप्तड़ घाटी में निवास किया और वहीं ध्यान एवं साधना की।

उनके प्रयासों से 1984 में खप्तड़ राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना हुई।

आज भी इस राष्ट्रीय उद्यान में:

  • उनका आश्रम
  • मंदिर
  • पत्थर की मूर्तियाँ

मौजूद हैं।

प्रारंभिक जीवन

खप्तड़ बाबा का जन्म 1880 में कश्मीर के डोगरा परिवार में हुआ था।

उनका प्रारंभिक नाम शिवनाथ डोगरा था।

संन्यास लेने से पहले वे एक कुशल एलोपैथिक डॉक्टर थे।

उन्होंने:

  • कोलकाता के ट्रॉपिकल मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई की
  • ब्रिटेन में सर्जरी का अध्ययन किया

बाद में उन्होंने चिकित्सा सेवा छोड़कर संन्यास ग्रहण कर लिया।

आध्यात्मिक जीवन

संन्यास लेने के बाद उन्होंने काशी के दक्षिणामूर्ति मठ में पूर्वी दर्शन का अध्ययन और अध्यापन किया।

इसके बाद उन्होंने नेपाल के खप्तड़ राष्ट्रीय उद्यान को अपनी साधना के लिए चुना और जीवन के अंतिम समय तक वहीं रहे।

Reference Wikipedia