बामाखेपा
व्यक्तिगत जीवन
जन्म: बामाचरण चट्टोपाध्याय
22 फरवरी 1837
अटला गाँव, बीरभूम, बंगाल प्रेसीडेंसी, कंपनी राज
मृत्यु: 18 जुलाई 1911 (आयु 74 वर्ष)
तारापीठ, बीरभूम, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश राज
राष्ट्रीयता: भारतीय
सम्मान: तारापीठ भैरव
धार्मिक जीवन
धर्म: हिंदू धर्म
मंदिर: तारापीठ
दर्शन: शक्तिवाद
धार्मिक जीवन यात्रा
गुरु: स्वामी कैलाशपति और वेदज्ञ मोक्षदानंद
बामाखेपा (बंगाली: बामाख्यापा, अर्थ: “पागल बामा”; 1837–1911), जिनका जन्म नाम बामाचरण चट्टोपाध्याय था, एक भारतीय हिंदू संत थे, जो बीरभूम जिले के तारापीठ में रहते थे। उनकी समाधि भी तारापीठ मंदिर के पास स्थित है।
उनका जन्म बीरभूम जिले के रामपुरहाट उपखंड के अटला गाँव में हुआ था।
साधक बामाखेपा की स्मृति स्थल
झारखंड के मालुटी में बामाखेपा का मंदिर
तारापीठ मंदिर परिसर में विराजमान बामाखेपा की प्रतिमा
वे देवी तारा के अत्यंत भक्त थे और मंदिर के पास रहते हुए श्मशान घाट में साधना करते थे।
उन्होंने मौलिक्षा मंदिर में भी माता की उपासना जारी रखी।
बामाखेपा को मंदिर में देवी से पहले ही भोजन दिया जाता था और कोई उन्हें रोकता नहीं था।
यह माना जाता है कि देवी तारा ने उन्हें श्मशान में अपने उग्र रूप में दर्शन दिए थे।
लोकप्रिय संस्कृति (Popular culture)
2007 से “साधक बामाखेपा” नामक एक टेलीसीरियल बंगाल में प्रसारित हुआ, जिसमें उनके जीवन को दर्शाया गया।
2011 तक इस धारावाहिक के लगभग 1500 एपिसोड प्रसारित हो चुके थे।
2019 में “महापीठ तारापीठ” नामक टेलीसीरियल में भी उनके जीवन और भक्ति का विस्तार से चित्रण किया गया।
Reference Wikipedia