गुलाबराव महाराज

गुलाबराव महाराज

आश्रम श्रीक्षेत्र मधान, अमरावती, महाराष्ट्र
अमरावती, महाराष्ट्र

Divine Journey & Teachings

गुलाबराव महाराज

परिचय

गुलाबराव महाराज (6 जुलाई 1881 – 20 सितंबर 1915) महाराष्ट्र के एक महान हिन्दू संत, दार्शनिक और विद्वान थे। उनका पूरा नाम गुलाब गोंडोजी मोहोड था।

वे जन्म से दृष्टिहीन (अंधे) थे, फिर भी उन्होंने समाज को अद्भुत आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टि प्रदान की। अपने केवल 34 वर्षों के जीवन में उन्होंने लगभग 139 ग्रंथ, 130 भाष्य (टिप्पणियाँ) और लगभग 25,000 पद्य (श्लोक) की रचना की।

व्यक्तिगत जीवन

  • जन्म: 6 जुलाई 1881
  • जन्म स्थान: अमरावती, महाराष्ट्र
  • पिता: गोंडूजी मोहोड
  • माता: आलोकाबाई मोहोड
  • मृत्यु: 20 सितंबर 1915 (पुणे)
  • सम्मान: संत, देव

धार्मिक जीवन

  • धर्म: हिन्दू धर्म
  • दर्शन: अद्वैत वेदांत, वारकरी परंपरा
  • गुरु: संत ज्ञानेश्वर

बाल्यकाल

गुलाबराव महाराज का जन्म एक मराठा कुनबी परिवार में हुआ था।

  • मात्र 9 महीने की आयु में गलत दवा के कारण उनकी दृष्टि चली गई
  • 4 वर्ष की आयु में उनकी माता का निधन हो गया
  • इसके बाद वे अपनी नानी के साथ लगभग 6 वर्षों तक रहे

बचपन में ही वे रात के समय अक्सर समाधि अवस्था में पाए जाते थे।

  • उनका श्वास रुक जाता था और वे योग मुद्रा में बैठते थे
  • प्रारंभ में परिवार के लोग डर जाते थे
  • बाद में विद्वानों ने इसे उनकी आध्यात्मिक स्थिति बताया

शिक्षा और ज्ञान 

  • उन्हें भजन, श्लोक और आध्यात्मिक साहित्य से विशेष लगाव था
  • वे अपने मित्रों से पढ़वाकर तुरंत उसे याद कर लेते थे
  • मात्र 10 वर्ष की आयु में उन्होंने वेद और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लिया

उनकी स्मरण शक्ति और ज्ञान अद्भुत था।

प्रारंभिक जीवन और आध्यात्मिक अनुभव

19 वर्ष की आयु में उन्हें संत ज्ञानेश्वर महाराज का दिव्य दर्शन हुआ।

  • उन्हें एक मंत्र प्राप्त हुआ
  • उनके निर्देश पर ज्ञानेश्वर महाराज का पहला चित्र बनाया गया
  • यह चित्र आज भी आलंदी के समाधि मंदिर में स्थित है

उन्हें “प्रज्ञाचक्षु” (बुद्धि की आँखों वाला) कहा जाता था, क्योंकि वे दृष्टिहीन होते हुए भी गहन ज्ञान रखते थे।

दर्शन – मधुराद्वैत 

गुलाबराव महाराज ने एक नया दर्शन प्रस्तुत किया जिसे “मधुराद्वैत” कहा जाता है।

अद्वैत वेदांत 

  • आत्मा और ब्रह्म एक हैं
  • संसार माया (भ्रम) है

मधुर भक्ति

  • भगवान कृष्ण के प्रति प्रेमपूर्ण भक्ति
  • भक्त और भगवान के बीच मधुर संबंध

👉 उन्होंने इन दोनों का समन्वय कर “मधुराद्वैत” का सिद्धांत दिया

विवाह

  • 1896 में उनका विवाह मनकर्णिका से हुआ
  • वे एक किसान गणाजी भुयार की पुत्री थीं

रचनाएँ और कार्य 

  • लगभग 133–139 ग्रंथों की रचना
  • 6000+ पृष्ठों का लेखन
  • 25,000 से अधिक पद्य

मुख्य विषय:

  • योग
  • ध्यान
  • भक्ति
  • वेदांत
  • आयुर्वेद (मानस आयुर्वेद)

उन्होंने जटिल विषयों जैसे उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और योग पर भी लेखन किया।

👉 विशेष बात:
वे बिना आँखों के भी किसी भी भाषा की पुस्तक को मानसिक रूप से समझ सकते थे

विशेषताएँ 

  • अद्भुत स्मरण शक्ति
  • गहन आध्यात्मिक ज्ञान
  • विद्वानों से शास्त्रार्थ में विजय
  • वेदों के प्रति गहरा सम्मान

हालाँकि वे कुनबी जाति से थे, उनके अधिकांश शिष्य ब्राह्मण थे।

मृत्यु 

  • 20 सितंबर 1915 को 34 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ
  • उनकी मृत्यु के बाद उन्हें व्यापक पहचान मिली

शिष्य और प्रभाव 

  • उनके कई शिष्य आत्मज्ञान प्राप्त कर संत बने
  • उनके प्रमुख शिष्य बाबा महाराज पंडित थे
  • उन्होंने अनेक ग्रंथ लिखे और ज्ञानेश्वर की रचनाओं पर भाष्य किया

पूर्व जन्म की मान्यता 

कुछ मान्यताओं के अनुसार:

  • गुलाबराव महाराज, स्वामी बेचारानंद महाराज के पुनर्जन्म थे
  • उन्होंने पूर्व जन्म में कठोर तपस्या की थी

एक कथा के अनुसार, बलवंतराव मराठे ने उन्हें पहचान लिया और उनके पूर्व जन्म का संबंध समझा।

Reference Wikipedia