संत गोरा कुंभार
परिचय
संत गोरा कुंभार (जिन्हें गोरबा भी कहा जाता है) महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध हिन्दू संत थे, जो भक्ति आंदोलन और वारकरी संप्रदाय से जुड़े हुए थे।
वे पेशे से कुंभार (मिट्टी के बर्तन बनाने वाले) थे और भगवान विठ्ठल के परम भक्त थे। उन्होंने अन्य संतों के साथ मिलकर सैकड़ों अभंग (भक्ति गीत) लिखे और गाए।
व्यक्तिगत जीवन
- जन्म: लगभग 1267 ई.
- मृत्यु: लगभग 1317 ई.
धार्मिक जीवन
- धर्म: हिन्दू धर्म
- दर्शन: भक्ति आंदोलन
- संप्रदाय: वारकरी
जीवन परिचय
संत गोरा कुंभार का जन्म महाराष्ट्र के सत्यपुरी गाँव में हुआ माना जाता है, जिसे आज गोरबा तेर (जिला धाराशिव) के नाम से जाना जाता है।
वे संत नामदेव के समकालीन माने जाते हैं और उनका जीवनकाल लगभग 1267 से 1317 ईस्वी के बीच माना जाता है।
उनका जीवन अत्यंत सरल था और वे अपने कार्य (मिट्टी के बर्तन बनाना) के साथ-साथ भगवान विठ्ठल की भक्ति में लीन रहते थे।
भक्ति और योगदान
- उन्होंने अनेक अभंग (भक्ति गीत) रचे
- उनकी रचनाएँ भक्ति, प्रेम और भगवान के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं
- वे वारकरी परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं
मंदिर और श्रद्धा
- उनके नाम पर एक छोटा मंदिर गोरबा तेर (धाराशिव, महाराष्ट्र) में स्थित है
- यहाँ श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं
लोकप्रिय संस्कृति
संत गोरा कुंभार के जीवन पर कई फिल्में बनाई गई हैं:
- “चक्रधारी” (1948, तेलुगु) – निर्देशक: के. एस. गोपालकृष्णन
- “चक्रधारी” (1948, तमिल)
- “भक्त कुंबारा” (1974, कन्नड़) – डॉ. राजकुमार अभिनीत, अत्यंत सफल फिल्म
- “चक्रधारी” (1977, तेलुगु) – वी. मधुसूदन राव द्वारा निर्देशित
- “भगत गोरा कुंभार” (1978, गुजराती) – दिनेश रावल द्वारा निर्देशित
Reference Wikipedia