अनुकूलचंद्र चक्रवर्ती
व्यक्तिगत जीवन
जन्म: अनुकूल चंद्र चक्रवर्ती
14 सितंबर 1888
पाबना जिला, ब्रिटिश भारत (वर्तमान बांग्लादेश)
मृत्यु: 27 जनवरी 1969 (आयु 80 वर्ष)
देवघर, बिहार (वर्तमान झारखंड), भारत
राष्ट्रीयता: भारतीय
पत्नी: जगतजननी शरोषीबाला
धार्मिक जीवन
धर्म: हिंदू
संस्थापक: सत्संग (देवघर)
युग पुरुषोत्तम श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र (14 सितंबर 1888 – 27 जनवरी 1969), जिन्हें लोकप्रिय रूप से श्री श्री ठाकुर के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय होम्योपैथिक चिकित्सक और आध्यात्मिक गुरु थे तथा झारखंड के देवघर में सत्संग के संस्थापक थे। उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
प्रारंभिक जीवन और सेवा
अनुकूलचंद्र चक्रवर्ती का जन्म 14 सितंबर 1888 को ब्रिटिश भारत के पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) के पाबना जिले के हिमायतपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम शिवचंद्र चक्रवर्ती और माता का नाम मनोमोहिनी देवी था।
कोलकाता में एक युवा चिकित्सा छात्र के रूप में उन्होंने 1911 में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों की सेवा और उपचार करना शुरू किया। छह वर्षों की पढ़ाई के बाद वे हिमायतपुर लौट आए और चिकित्सा अभ्यास शुरू किया।
उनके अनुयायी उन्हें “युग पुरुषोत्तम” या आधुनिक युग के पैगंबर के रूप में संबोधित करते हैं। उन्होंने बिहार (वर्तमान झारखंड) के देवघर में “सत्संग” की स्थापना की।
अगस्त 1909 में अनुकूलचंद्र का विवाह शरोषीबाला देवी से हुआ। 17 नवंबर 1930 को उन्होंने सर्वमंगला से भी विवाह किया, जो उनकी पहली पत्नी की छोटी बहन थीं।
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