स्वामी पूर्णचैतन्य

स्वामी पूर्णचैतन्य

श्री हरि कृपा आश्रम
लीडेन, नीदरलैंड

Divine Journey & Teachings

स्वामी पूर्णचैतन्य

परिचय

स्वामी पूर्णचैतन्य एक डच मूल के आध्यात्मिक शिक्षक, लेखक, जीवन-प्रशिक्षक (Life Coach) और वक्ता हैं। उनका जन्म नीदरलैंड में हुआ और वे “आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन” से जुड़े हुए हैं। वे भारत और विदेशों में योग और ध्यान का शिक्षण करते हैं तथा विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा, ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों में सक्रिय हैं।

व्यक्तिगत जीवन

  • जन्म नाम: फ्रीक अलेक्जेंडर लुथरा (Freek Alexander Luthra)
  • जन्म: 26 अक्टूबर 1984
  • जन्म स्थान: लीडेन, नीदरलैंड
  • पेशा: लेखक, जीवन-प्रशिक्षक, वक्ता

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

स्वामी पूर्णचैतन्य का जन्म नीदरलैंड के लीडेन शहर में हुआ। उनके पिता डच और माता भारतीय थीं, जिनकी आध्यात्मिक रुचि के कारण उन्हें बचपन से ही योग, ध्यान और पूर्वी दर्शन का परिचय मिला। पाँच वर्ष की आयु में उनका परिवार हार्लेम शहर में बस गया, जहाँ उन्होंने अपना बचपन और किशोरावस्था बिताई।

बचपन से ही उन्हें पूर्वी परंपराओं और मार्शल आर्ट्स में रुचि थी, जिसके कारण उन्होंने ऐकिडो, तायक्वांडो, जूडो, निनपो बुजुत्सु, कैपोएरा और कुंगफू जैसी विधाओं का अभ्यास किया। इससे उन्हें अनुशासन, संतुलन और श्वास नियंत्रण का महत्व समझ में आया।

उन्होंने लीडेन विश्वविद्यालय से इंडोलॉजी (भारतीय और तिब्बती भाषाएँ एवं संस्कृति) का अध्ययन किया, जिसमें संस्कृत उनका मुख्य विषय था। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारिता और न्यू मीडिया का भी अध्ययन किया।

आध्यात्मिक यात्रा 

वर्ष 2000 में, 16 वर्ष की आयु में, उन्होंने एम्स्टर्डम में एक कार्यक्रम के दौरान श्री श्री रवि शंकर से मुलाकात की और “आर्ट ऑफ लिविंग” के कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया।

अपनी शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे भारत आए और 2007 में बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय में पूर्णकालिक स्वयंसेवक के रूप में कार्य करना शुरू किया। यहाँ उन्होंने विभिन्न विभागों का संचालन किया और वेद अध्ययन भी किया।

वर्ष 2012 में उन्हें श्री श्री रवि शंकर द्वारा संन्यास की दीक्षा दी गई और उनका नाम “स्वामी पूर्णचैतन्य” रखा गया, जिसका अर्थ है “पूर्ण चेतना वाला व्यक्ति”।

शिक्षण, सेवा और सामाजिक कार्य

स्वामी पूर्णचैतन्य 2008 से आर्ट ऑफ लिविंग के विभिन्न योग और आत्म-विकास कार्यक्रमों के शिक्षक हैं। वे एक प्रमाणित योग शिक्षक (QCI Level-2) हैं और भारत में श्री श्री योग के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में भी कार्य करते हैं।

2009 से उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों—आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु—में विभिन्न कार्यक्रम और सेवा गतिविधियाँ शुरू कीं। 2011 से उनका कार्य क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत की ओर केंद्रित हो गया, जहाँ उन्होंने असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के कुछ भागों में व्यापक कार्य किया।

उन्होंने नेपाल, भूटान, श्रीलंका, हांगकांग, दुबई और यूरोप के कई देशों में भी योग और ध्यान कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

रचनाएँ 

स्वामी पूर्णचैतन्य ने “Looking Inwards: Meditating to Survive in a Changing World” नामक पुस्तक लिखी है, जो 2021 में प्रकाशित हुई। यह पुस्तक ध्यान और आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने पर आधारित है।

Reference Wikipedia