कृष्णदास कविराज

कृष्णदास कविराज

राधा-कुण्ड, वृंदावन (गोवर्धन के पास)
बर्दवान जिले के झामटपुर , बंगाल

Divine Journey & Teachings

कृष्णदास कविराज

परिचय

कृष्णदास (1496 – 15 अक्टूबर 1588), जिन्हें कविराज की उपाधि से जाना जाता है, एक महान वैष्णव संत और लेखक थे।

वे प्रसिद्ध ग्रंथ “चैतन्य चरितामृत” के लेखक थे, जो संत चैतन्य महाप्रभु (1486–1533) के जीवन पर आधारित एक प्रमुख जीवनी है।

गौड़ीय वैष्णव परंपरा में चैतन्य महाप्रभु को राधा और कृष्ण के संयुक्त अवतार के रूप में माना जाता है।

जीवन परिचय

कृष्णदास कविराज के जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।

उनका जन्म 1496 में बंगाल के बर्धमान जिले के झामटपुर गाँव में एक वैद्य (बैद्य) परिवार में हुआ था।

पिता: भागीरथ
माता: सुनंदा

उनका एक छोटा भाई भी था।

कम उम्र में ही उनके माता-पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनके रिश्तेदारों ने किया।

उनका निधन 15 अक्टूबर 1588 को हुआ।

उनकी समाधि वृंदावन के राधा-दामोदर मंदिर परिसर में स्थित है।

आध्यात्मिक जीवन

कृष्णदास कविराज ने अपने ग्रंथ “चैतन्य चरितामृत” में एक घटना का वर्णन किया है, जिसमें उनके भाई ने वैष्णव भक्त मीनकेतना रामदास के साथ विवाद किया था।

इस विवाद में उनके भाई ने नित्यानंद प्रभु के महत्व को कम करके आंका।

कृष्णदास ने इसे गंभीर अपराध माना और अपने भाई से संबंध समाप्त कर लिया।

वृंदावन यात्रा

एक स्वप्न में नित्यानंद प्रभु के निर्देश मिलने के बाद कृष्णदास ने बंगाल छोड़ दिया और वृंदावन चले गए।

वहाँ उन्होंने रघुनाथ दास गोस्वामी से दीक्षा ली, जो चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख शिष्यों में से एक थे।

चैतन्य चरितामृत

वृद्धावस्था और अस्वस्थता के बावजूद कृष्णदास कविराज ने अपना महान ग्रंथ “चैतन्य चरितामृत” लिखना प्रारंभ किया (लगभग 1557)।

उन्होंने स्वयं लिखा:

“अब मैं बहुत वृद्ध हो गया हूँ और रोगों से ग्रस्त हूँ।
लिखते समय मेरे हाथ काँपते हैं,
मुझे कुछ याद नहीं रहता,
न ठीक से देख सकता हूँ, न सुन सकता हूँ।
फिर भी मैं लिख रहा हूँ — यह एक आश्चर्य है।”

इस ग्रंथ की रचना के लिए उन्होंने:

  • मुरारी गुप्त और स्वरूप दामोदर की डायरी
  • अपने गुरु रघुनाथ दास गोस्वामी से प्राप्त जानकारी

का उपयोग किया।

यह ग्रंथ चैतन्य महाप्रभु के जीवन और उपदेशों का सबसे प्रामाणिक विवरण माना जाता है।

अन्य मान्यताएँ

कवि कर्णपूर के ग्रंथ “गौर-गणोद्देश-दीपिका” में कृष्णदास कविराज को राधा की दासी “कस्तूरी मंजरी” का अवतार माना गया है।

प्रमुख रचनाएँ

  • चैतन्य चरितामृत – चैतन्य महाप्रभु की प्रमुख जीवनी
  • श्री गोविंद लीलामृत – वृंदावन में कृष्ण की दैनिक लीलाओं का वर्णन
  • सारंग-रंगदा कंगदा टीका – कृष्ण-कर्णामृत पर टीका

Reference Wikipedia