श्री श्री रवि शंकर

श्री श्री रवि शंकर

द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर
पापनासम, तंजावुर जिला, तमिलनाडु, भारत

Divine Journey & Teachings

श्री श्री रवि शंकर

परिचय

श्री श्री रवि शंकर (जन्म: 13 मई 1956) एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु और आध्यात्मिक नेता हैं, जिन्हें “श्री श्री” और “गुरुदेव” जैसे सम्मानसूचक नामों से भी जाना जाता है। उन्होंने 1981 में “आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन” की स्थापना की। 1970 के दशक के मध्य में उन्होंने महर्षि महेश योगी के अधीन कार्य किया, जो ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन के संस्थापक थे। उनका कार्य ध्यान, योग और तनाव प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों पर आधारित है, और वे “सुदर्शन क्रिया” नामक श्वास तकनीक के विकास से भी जुड़े हैं। उन्हें वर्ष 2016 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

व्यक्तिगत जीवन

  • जन्म: 13 मई 1956
  • जन्म स्थान: पापनासम, तंजावुर जिला, तमिलनाडु, भारत
  • शिक्षा: सेंट जोसेफ कॉलेज, बैंगलोर (भौतिकी में स्नातक)

श्री श्री रवि शंकर का जन्म विशलाक्षी और आर. एस. वेंकट रत्नम के घर हुआ। उनका नाम “रवि” इसलिए रखा गया क्योंकि उनका जन्म रविवार को हुआ था, जबकि “शंकर” नाम आदि शंकराचार्य के सम्मान में रखा गया।

जीवन और साधना

उनके प्रथम गुरु सुधाकर चतुर्वेदी थे, जो एक प्रसिद्ध वैदिक विद्वान और महात्मा गांधी के सहयोगी थे। उन्होंने 1973 में भौतिकी में स्नातक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने महर्षि महेश योगी के साथ कार्य किया और वैदिक विज्ञान, ध्यान तथा आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया।

1980 के दशक में उन्होंने विश्वभर में आध्यात्मिकता से जुड़े व्यावहारिक और अनुभवात्मक पाठ्यक्रम शुरू किए। वर्ष 1982 में उन्होंने “सुदर्शन क्रिया” नामक श्वास तकनीक विकसित की, जो उन्हें कर्नाटक की भद्रा नदी के तट पर दस दिन की मौन साधना के दौरान प्रेरणा के रूप में प्राप्त हुई। 1983 में उन्होंने स्विट्ज़रलैंड में पहला “आर्ट ऑफ लिविंग” कोर्स आयोजित किया और 1986 में अमेरिका में भी इसका विस्तार किया।

दर्शन और शिक्षाएँ

श्री श्री रवि शंकर के अनुसार आध्यात्मिकता वह है जो मानव मूल्यों जैसे प्रेम, करुणा और उत्साह को बढ़ाती है। उनका मानना है कि आध्यात्मिकता किसी एक धर्म या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी लोगों के लिए खुली है। उनके अनुसार विज्ञान और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि दोनों ज्ञान की खोज से उत्पन्न होते हैं।

वे कहते हैं कि “मैं कौन हूँ?” यह प्रश्न आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है, जबकि “यह क्या है?” विज्ञान की ओर ले जाता है। उनका दृष्टिकोण है कि आनंद केवल वर्तमान क्षण में ही प्राप्त किया जा सकता है और उनका लक्ष्य एक ऐसा विश्व बनाना है जो तनाव और हिंसा से मुक्त हो। उनके अनुसार श्वास शरीर और मन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है और ध्यान तथा सेवा दोनों जीवन में आवश्यक हैं।

आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन

श्री श्री रवि शंकर ने 1981 में “आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन” की स्थापना की, जो एक स्वयंसेवी गैर-सरकारी संगठन है। यह संगठन योग, ध्यान और श्वास तकनीकों पर आधारित कार्यक्रम चलाता है और 1996 से संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद से संबद्ध है।

इसके कार्यक्रमों में “सुदर्शन क्रिया” प्रमुख है, जो तनाव और चिंता को कम करने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा यह संगठन आपदा राहत, ग्रामीण विकास और अन्य सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय है।

सामाजिक और मानवीय कार्य

श्री श्री रवि शंकर ने “इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन वैल्यूज़ (IAHV)” की स्थापना की, जो शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों का संचालन करती है।

उनके संगठन के माध्यम से ग्रामीण भारत में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए “केयर फॉर चिल्ड्रेन” कार्यक्रम चलाया जाता है, जिसके अंतर्गत सैकड़ों स्कूलों में बच्चों को सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, उनके कार्यक्रम विश्वविद्यालयों में भी लागू किए गए हैं, जहाँ तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल सिखाए जाते हैं।

पर्यावरणीय पहल

2013 से उनके संगठन ने भारत में नदी पुनर्जीवन और भूजल संरक्षण से जुड़े कार्य किए हैं, जिनमें वृक्षारोपण और चेक डैम निर्माण शामिल है। इन प्रयासों को सरकारी स्तर पर सराहना भी मिली, हालांकि कुछ परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय विवाद भी सामने आए, विशेष रूप से 2016 के वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल को लेकर।

संस्थागत कार्यक्रम और पुनर्वास

1992 में उन्होंने “प्रिजन SMART” कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत जेलों में कैदियों को योग और ध्यान की शिक्षा दी जाती है। यह कार्यक्रम भारत, अमेरिका और यूरोप के कई कारागारों में लागू किया गया है और कैदियों के मानसिक एवं भावनात्मक सुधार में सहायक माना जाता है।

पाकिस्तान

श्री श्री रवि शंकर ने वर्ष 2004 में सद्भावना मिशन के तहत पाकिस्तान का दौरा किया और पुनः 2012 में इस्लामाबाद तथा कराची में “आर्ट ऑफ लिविंग” केंद्रों का उद्घाटन किया। हालांकि मार्च 2014 में इस्लामाबाद स्थित केंद्र को सशस्त्र लोगों द्वारा जला दिया गया, जिससे शांति प्रयासों को चुनौती भी मिली।

इराक

वर्ष 2007 और 2008 में इराक के तत्कालीन प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के निमंत्रण पर श्री श्री रवि शंकर ने इराक का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक और धार्मिक नेताओं से मुलाकात कर वैश्विक शांति को बढ़ावा देने का प्रयास किया। नवंबर 2014 में उन्होंने एरबिल स्थित राहत शिविरों का दौरा किया और यज़ीदी तथा अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों की स्थिति पर एक सम्मेलन भी आयोजित किया।

कोलंबिया और FARC 

जून 2015 में श्री श्री रवि शंकर ने कोलंबिया सरकार और FARC के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जो हवाना में शांति वार्ता कर रहे थे। उन्होंने FARC नेताओं से गांधीवादी अहिंसा के सिद्धांत को अपनाने का आग्रह किया। उनके इस योगदान के लिए कोलंबिया की संसद ने उन्हें “साइमन बोलिवर ऑर्डर ऑफ डेमोक्रेसी” से सम्मानित किया।

वेनेज़ुएला 

वर्ष 2019 में श्री श्री रवि शंकर ने वेनेज़ुएला के दोनों पक्षों के नेताओं से मुलाकात कर राजनीतिक संघर्ष को समाप्त करने और देश में शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के लिए संवाद को प्रोत्साहित किया।

कश्मीर 

नवंबर 2016 में जम्मू में “कश्मीर बैक टू पैराडाइज” सम्मेलन के दौरान “साउथ एशियन फोरम फॉर पीस” की स्थापना की गई। श्री श्री रवि शंकर के अनुसार कश्मीर के 90% लोग शांति चाहते हैं, लेकिन उनकी आवाज़ अनसुनी रह जाती है। उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान कश्मीरियों के माध्यम से ही संभव है। यह मंच दक्षिण एशिया के देशों के बीच उद्यमिता, कौशल विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया।

पूर्वोत्तर भारत 

अगस्त 2017 में भारत के 71वें स्वतंत्रता दिवस से पहले मणिपुर में 11 उग्रवादी संगठनों के 68 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसमें श्री श्री रवि शंकर के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने उनके प्रयासों की सराहना की।

सितंबर 2017 में “Strength in Diversity – North East Indigenous People's Conference” के दौरान उन्होंने बताया कि लगभग 500 और उग्रवादी शांति प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस सम्मेलन में पूर्वोत्तर के 67 संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

अयोध्या राम मंदिर विवाद 

वर्ष 2017 में अयोध्या विवाद में मध्यस्थता के उनके प्रयासों को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों से मिश्रित प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने एक समझौता प्रस्ताव रखा जिसमें दोनों समुदाय एक-दूसरे को भूमि उपहार स्वरूप दें, लेकिन इसे व्यापक विरोध और संदेह का सामना करना पड़ा।

मार्च 2019 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति में शामिल किया। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतिम निर्णय में विवादित भूमि मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट को और मस्जिद निर्माण के लिए वैकल्पिक भूमि प्रदान की।

अंतरधार्मिक संवाद 

श्री श्री रवि शंकर अंतरधार्मिक संवाद में सक्रिय रूप से शामिल हैं और वर्तमान में “एलिजाह इंटरफेथ इंस्टीट्यूट” के विश्व धार्मिक नेताओं के बोर्ड के सदस्य हैं। उन्होंने 2008 और 2010 में आयोजित इंटरफेथ सम्मेलनों के माध्यम से HIV के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा दिया।

जुलाई 2013 में जिनेवा स्थित UNAIDS मुख्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने HIV रोकथाम, लैंगिक हिंसा, भेदभाव और सामाजिक कलंक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

Reference Wikipedia