(अखंडलेश्वर मंदिर, प्रतापरुद्रपुर, ओडिशा में जयदेव की पत्थर की मूर्ति)
जन्म: लगभग 1170 ईस्वी
पूर्वी भारत (जन्मस्थान विवादित)
मृत्यु: लगभग 1245 ईस्वी
धर्म: हिन्दू धर्म
दर्शन: वैष्णव
जयदेव (उच्चारण: जयदेव) 12वीं शताब्दी के एक महान संस्कृत कवि थे। वे विशेष रूप से अपने प्रसिद्ध काव्य “गीत गोविंद” के लिए जाने जाते हैं। यह काव्य भगवान श्रीकृष्ण और गोपी राधा के प्रेम का अत्यंत सुंदर और आध्यात्मिक वर्णन प्रस्तुत करता है।
इस ग्रंथ में राधा को कृष्ण से भी अधिक महत्व दिया गया है, और यह भक्ति आंदोलन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
जयदेव के जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। माना जाता है कि वे एक एकांतप्रिय कवि और संन्यासी थे, जो पूर्वी भारत में अपनी काव्य प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध थे।
वे सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित भजनों के सबसे प्राचीन ज्ञात रचनाकारों में से एक हैं।
जयदेव का जन्म स्थान निश्चित नहीं है। “गीत गोविंद” में उनके जन्म स्थान को “किंडुबिल्व” (Kindubilva) बताया गया है।
विद्वानों ने इस स्थान की पहचान विभिन्न स्थानों से की है, जैसे:
कई प्राचीन ग्रंथों में उन्हें “उत्कल” (ओडिशा) का निवासी बताया गया है।
जयदेव का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
उनके पिता का नाम भोजदेव और माता का नाम रामादेवी था।
मंदिरों के अभिलेखों के अनुसार, जयदेव ने ओडिशा के कोणार्क के पास स्थित “कूर्मपटका” नामक स्थान पर संस्कृत काव्य की शिक्षा प्राप्त की थी।
जयदेव का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ गीत गोविंद है, जो भक्ति साहित्य का एक अमूल्य रत्न है।
जयदेव का काव्य ओडिशी संगीत और नृत्य परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में “बड़सिंघार” (रात्रि पूजा) के समय गीत गोविंद का गायन किया जाता है।
उनकी रचनाओं ने गुरु नानक देव जी को भी प्रभावित किया था।
Reference Wikipedia