श्री गजानन महाराज एक प्रसिद्ध भारतीय हिन्दू संत, गुरु और योगी थे। वे अपने आध्यात्मिक चमत्कारों और दिव्य शक्तियों के लिए जाने जाते हैं। उनका जीवन रहस्यमय माना जाता है और उनके जन्म तथा प्रारंभिक जीवन के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
श्री गजानन महाराज पहली बार 23 फरवरी 1878 को महाराष्ट्र के शेगांव गाँव में एक युवा के रूप में प्रकट हुए। उनके जन्म और बचपन के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है।
उनके जीवन के बारे में जानकारी मुख्य रूप से उनके भक्तों द्वारा लिखी गई पुस्तकों से मिलती है, जैसे:
इन ग्रंथों में उनके जीवन से जुड़े कई चमत्कारों और घटनाओं का वर्णन किया गया है।
उनके जीवन में कई अलौकिक घटनाएँ और चमत्कार बताए जाते हैं, जो उनके भक्तों के लिए श्रद्धा का आधार हैं।
गजानन महाराज को एक सिद्ध योगी और परम ज्ञानी संत माना जाता है।
उनकी जीवनी के अनुसार, वे कई महान संतों को अपना “भाई” मानते थे, जैसे:
यह भी माना जाता है कि वे अपने भक्तों को विभिन्न रूपों में दर्शन देते थे, जैसे:
गजानन महाराज की तुलना अक्कलकोट के स्वामी समर्थ से भी की जाती है:
गजानन महाराज ने संजೀವन समाधि 8 सितम्बर 1910 को ग्रहण की।
श्री गजानन विजय ग्रंथ के अनुसार, एक साहूकार बंकटलाल अग्रवाल ने 23 फरवरी 1878 को पहली बार गजानन महाराज को देखा। वे शेगांव की एक सड़क पर समाधि अवस्था में बैठे थे और लोगों द्वारा फेंका गया बचा हुआ भोजन खा रहे थे।
भक्तों ने इसे एक दिव्य संदेश माना:
👉 अन्न पवित्र है और इसे कभी व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
गजानन महाराज ने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए, जिनका वर्णन ग्रंथों में मिलता है:
इन सभी चमत्कारों को उनकी योग साधना और सिद्धियों का परिणाम माना जाता है।
एक शिव जयंती कार्यक्रम में गजानन महाराज की भेंट लोकमान्य तिलक से हुई।
महाराज ने उनके भाषण के बाद भविष्यवाणी की कि उन्हें अंग्रेजों द्वारा कठोर दंड मिलेगा, जो बाद में सत्य साबित हुआ।
सजा से पहले तिलक ने महाराज से आशीर्वाद लिया, जिससे उन्हें “श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य” लिखने की शक्ति मिली।
8 सितम्बर 1910 को गजानन महाराज ने संजीवन समाधि ग्रहण की।
भक्तों का विश्वास है कि उनकी दिव्य उपस्थिति आज भी वहाँ विद्यमान है।
एक भक्त ने काशी में मनोकामना पूर्ण होने पर महाराज को गांजा अर्पित करने का व्रत लिया था।
जब वह शेगांव पहुँचा, तो उसे यह अर्पण करने में संकोच हुआ। तब महाराज ने स्वयं कहा:
👉 “जब व्रत लिया था, तब लज्जा नहीं आई?”
इस घटना से यह सिद्ध होता है कि महाराज सच्चे भक्तों की भावना का सम्मान करते थे।
महाराज द्वारा प्रज्वलित धूनी (पवित्र अग्नि) आज भी उनके समाधि मंदिर के पास जल रही है।
भक्तों का मानना है कि यह धूनी उनकी दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है और उनकी उपस्थिति को दर्शाती है।
संस्थान द्वारा:
शेगांव रेलवे स्टेशन मुंबई-हावड़ा मार्ग पर स्थित है, जहाँ कई ट्रेनें रुकती हैं।
गजानन महाराज के मंदिर भारत के कई स्थानों पर स्थित हैं, जैसे:
Reference Wikipedia