देवराहा बाबा एक प्रसिद्ध भारतीय सिद्ध योगी संत थे, जिन्हें “अजर-अमर योगी” के रूप में जाना जाता था। वे वृंदावन में यमुना नदी के किनारे निवास करते थे और अपनी अलौकिक साधना तथा दिव्य आशीर्वाद के लिए प्रसिद्ध थे।
देवराहा बाबा के प्रारंभिक जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। माना जाता है कि 20वीं सदी के पूर्वार्ध में उन्होंने उत्तर प्रदेश के सलेमपुर के निकट मैल नामक स्थान पर निवास किया। वहाँ वे सरयू नदी के किनारे एक लकड़ी के ऊँचे मचान (मंच) पर रहते थे।
बाद में वे वृंदावन चले गए, जहाँ उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय यमुना नदी के किनारे मचान पर ही व्यतीत किया।
वे भारत के विभिन्न स्थानों पर भ्रमण करते रहे और अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाने जाते थे। तारा तारिणी शक्तिपीठ (ओडिशा) में उन्हें “चमत्कारी बाबा” के नाम से पुकारा जाता था। वहाँ के पुजारी आज भी उनके चमत्कारों को स्मरण करते हैं।
देवराहा बाबा एक ऐसे संत थे जिन्हें समाज के हर वर्ग—गरीब से लेकर उच्च पदस्थ व्यक्तियों तक—का आध्यात्मिक मार्गदर्शक माना जाता था। उनके दर्शन के लिए आम लोग और बड़े-बड़े नेता घंटों प्रतीक्षा करते थे।
उनसे आशीर्वाद लेने वालों में कई प्रमुख नेता शामिल थे, जैसे:
विशेष रूप से 1989 के चुनावों के समय राजीव गांधी और उनकी पत्नी उनसे आशीर्वाद लेने पहुँचे थे।
वे अपने भक्तों को अपने चरणों से आशीर्वाद देते थे, जो उनकी विशेष पहचान थी।
देवराहा बाबा एक तपस्वी जीवन जीते थे।
देवराहा बाबा की आयु को लेकर कई रहस्य और मान्यताएँ प्रचलित हैं।
हालाँकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी उनकी दीर्घायु और योग शक्ति लोगों के लिए आश्चर्य का विषय रही है।
देवराहा बाबा का निधन 19 जून 1990 को वृंदावन में हुआ। उनकी समाधि वहीं स्थापित है, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है।
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