श्री ध्यानयोगी मधुसूदनदास

श्री ध्यानयोगी मधुसूदनदास

श्री मधुसूदन ध्यान योग निकेतन
बिहार, भारत

Divine Journey & Teachings

श्री ध्यानयोगी मधुसूदनदास

व्यक्तिगत जीवन 

जन्म: काशीनाथ मिश्रा
वर्ष: 1878 (कथित)
स्थान: बिहार, भारत

मृत्यु: 29 अगस्त 1994
स्थान: अहमदाबाद, भारत

धार्मिक जीवन

धर्म: हिंदू धर्म
दर्शन: कुंडलिनी महायोग

धार्मिक जीवन 

गुरु: श्री योगीराज परमेश्वरदासजी

उद्धरण

“जो भी मेरे पास शक्तिपात के लिए आए, वे सभी योग्य हैं और सभी मेरे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी हैं, क्योंकि मेरी शक्ति उनके माध्यम से कार्य करती है।”

परिचय 

श्री ध्यानयोगी मधुसूदनदास, जिन्हें काशीनाथ और मधुसूदनदास के नाम से भी जाना जाता है, भारत के एक महान योगी और लेखक थे।

उनका जन्म बिहार में हुआ था।

उनके प्रमुख शिष्यों में श्री आनंदी माँ और ओमदासजी महाराज शामिल थे।

वे कुंडलिनी महायोग के महान आचार्य थे और उन्होंने इस योग पद्धति को अमेरिका में लोकप्रिय बनाया।

जीवन और साधना 

मधुसूदनदास का जन्म बिहार के उत्तरी क्षेत्र में हुआ।

उन्होंने लगभग 37 वर्षों तक योग साधना की।

43 वर्ष की आयु में उनकी मुलाकात उनके गुरु परमेश्वरदासजी से माउंट आबू में हुई, जहाँ उन्हें शक्तिपात दीक्षा प्राप्त हुई।

उन्होंने अपना जीवन साधकों में कुंडलिनी जागरण के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने बिहार में एक अस्पताल और गुजरात में एक विद्यालय की स्थापना की।

1976 से 1980 के बीच वे अमेरिका में रहे और वहाँ सार्वजनिक रूप से कुंडलिनी जागरण सत्र आयोजित किए।

वे “ध्यानयोगा सेंटर्स, इंक.” के संस्थापक थे।

मृत्यु 

29 अगस्त 1994 को उनका निधन हुआ।

कहा जाता है कि उस समय उनकी आयु लगभग 116 वर्ष थी।

प्रमुख रचनाएँ 

Message to Disciples (1968)
Light on Meditation: a Definitive Work on Kundalini and Raja Yoga (1978)
Brahmanada: Sound, Mantra and Power (1979)
Death, Dying and Beyond Yoga (1979)
Yoga Dipika: Lamp of Yoga (1979)
Shakti: An Introduction to Kundalini Maha Yoga (2000)

Reference Wikipedia