भगत धन्ना जाट

भगत धन्ना जाट

धुआँ कलां,चौरू गाँव,टोंक
धुआँ कलां,चौरू गाँव,टोंक

Divine Journey & Teachings

भगत धन्ना जाट 

व्यक्तिगत जीवन
जन्म: 20 अप्रैल 1415
चौरू, तहसील फागी, जयपुर, राजस्थान

मृत्यु: 15वीं शताब्दी के प्रारंभ में
धुआँ कलां, टोंक जिला, राजस्थान

प्रसिद्धि के लिए:
• धन्नावंशी बैरागी संप्रदाय के संस्थापक
• गुरु ग्रंथ साहिब में 3 पदों के रचयिता

अन्य नाम: धन्ना बैरागी, धन्ना जाट

व्यवसाय: किसान

धार्मिक जीवन
धर्म: हिंदू धर्म
दर्शन: विशिष्टाद्वैत
संप्रदाय: रामानंदी संप्रदाय

धार्मिक जीवन यात्रा
गुरु: रामानंद

भगत धन्ना, जिन्हें धन्ना जाट, धन्ना जट्ट, धन्ना बैरागी या संत धन्ना के नाम से भी जाना जाता है (जन्म 1415), एक रहस्यवादी कवि और वैष्णव भक्त थे।

उनके अनुयायी, जो मुख्यतः विभिन्न जाति समुदायों से थे, “धन्नावंशी स्वामी” के नाम से जाने जाते हैं और राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए हैं।

उनके तीन भजन गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं।

प्रारंभिक जीवन (Early life)

धन्ना का जन्म राजस्थान के जयपुर जिले की फागी तहसील के चौरू गाँव में एक हिंदू जाट परिवार में हुआ था।

वे भक्ति संत-कवि रामानंद के शिष्य थे।

दिव्य शक्तियाँ (Divine powers)

19वीं शताब्दी के एक भित्ति चित्र में भगत धन्ना का चित्रण

भगत धन्ना की दिव्य शक्तियों से संबंधित अनेक कथाएँ प्रचलित हैं।

एक कथा के अनुसार, एक बार वे अपने खेत में हल चला रहे थे, तभी कई संन्यासी भोजन की खोज में उनके पास आए।

धन्ना भगत ने अपने पास मौजूद सारे बीज उन्हें दे दिए, जो वे अपने खेत में बोने के लिए रखे थे, और बिना बीज बोए ही खेत जोत दिया।

बाद में खेत में अनाज के स्थान पर लौकियाँ उग आईं।

जब उनका जागीरदार कर वसूलने आया, तो धन्ना भगत ने उसे दो लौकियाँ दीं।

जागीरदार ने क्रोधित होकर उन लौकियों को तोड़ दिया, लेकिन उसके अंदर मोती भरे हुए थे।

इस कथा का उल्लेख संत मीरा बाई ने अपनी कविता में भी किया है—
“सुन लीजो बिनती मोरी, मैं शरण गही प्रभु तेरी।”

विरासत (Legacy)

प्रारंभिक सिख साहित्य के अनुसार, पंज प्यारे में से एक धर्म सिंह को भगत धन्ना का पुनर्जन्म माना जाता है।

धालीवाल गोत्र के लोग यह दावा करते हैं कि भगत धन्ना इसी गोत्र से संबंधित थे।

लोकप्रिय संस्कृति (Popular culture)

टोंक जिले के धुआँ कलां गाँव में भगत धन्ना जी का मंदिर और गुरुद्वारा स्थित है।

भारतीय फिल्म निर्माता केदार नाथ शर्मा ने 1945 में “धन्ना भगत” नामक फिल्म बनाई, जिसमें कमल जमींदार ने मुख्य भूमिका निभाई।

1974 में “भगत धन्ना जट्ट” नामक पंजाबी फिल्म भी बनी, जिसमें दारा सिंह ने अभिनय किया।

Reference Wikipedia