स्वामी भूमानंद तीर्थ एक भारतीय सन्यासी, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक हैं। वे वेदांत, भगवद गीता, उपनिषद और श्रीमद्भागवतम पर अपने प्रवचनों तथा उनके व्यावहारिक जीवन में प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कुछ हिंदू मंदिरों में प्रचलित अवैध और अनुचित परंपराओं को समाप्त करने के लिए भी कई सामाजिक आंदोलनों का नेतृत्व किया।
स्वामी भूमानंद तीर्थ का जन्म केरल के त्रिशूर जिले के परलीक्कड गाँव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में प्राप्त की और बाद में अपने दो सन्यासी भाइयों के साथ मिलकर “व्यास कॉलेज” की स्थापना की।
अपने पेशेवर जीवन के दौरान कोलकाता में उनकी मुलाकात बाबा गंगाधर परमहंस से हुई, जो बाद में उनके गुरु बने। इसी संगति ने उन्हें आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित किया और वे सन्यास तथा आध्यात्मिक साधना में प्रवृत्त हुए।
स्वामी भूमानंद तीर्थ द्वारा आयोजित “ज्ञान यज्ञ” उनके “लोक-संग्रह” (विश्व कल्याण) अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहला ज्ञान यज्ञ 1964 में जमशेदपुर में आयोजित किया गया था और इसके बाद यह कार्यक्रम भारत के विभिन्न भागों के साथ-साथ मलेशिया और अमेरिका में भी नियमित रूप से आयोजित किया जाता रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वे आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते हैं।
स्वामी भूमानंद तीर्थ ने समाज में प्रचलित कुछ अनुचित और अवैध धार्मिक प्रथाओं के विरोध में आंदोलन चलाए। इनमें एर्नाकुलम जिले के इलावूर पुथनकावु मंदिर में “थूककम” प्रथा और कोडुंगलूर मंदिर के भारणी उत्सव के दौरान अश्लील गीतों की परंपरा के विरुद्ध उनके प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
स्वामी भूमानंद तीर्थ का मुख्य आश्रम “नारायणाश्रम तपोवनम” केरल के वेंगिनिस्सेरी गाँव में स्थित है, जो त्रिशूर शहर से लगभग 10 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। इसके अतिरिक्त “सेंटर फॉर इनर रिसोर्स डेवलपमेंट (C.I.R.D)” के केंद्र दिल्ली, जमशेदपुर और अमेरिका में स्थित हैं, जबकि “सोसाइटी फॉर इनर रिसोर्स डेवलपमेंट (S.I.R.D)” मलेशिया के कुआलालंपुर में कार्यरत है।
स्वामी भूमानंद तीर्थ ने जून 2008 में “फाउंडेशन फॉर रेस्टोरेशन ऑफ नेशनल वैल्यूज़ (FRNV)” की स्थापना में योगदान दिया। इस संस्था का उद्देश्य भारतीय समाज में नैतिक और राष्ट्रीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। इसके सलाहकार मंडल में एम. एन. वेंकटचलैया, रतन टाटा, ई. श्रीधरन और एन. विट्टल जैसे प्रमुख व्यक्तित्व शामिल रहे हैं।
स्वामी भूमानंद तीर्थ ने अनेक भाषाओं—अंग्रेज़ी, मलयालम, हिंदी, तमिल और बंगाली—में पुस्तकें और प्रवचन प्रकाशित किए हैं। उन्होंने 1968 में “विचारसेतु” नामक अंग्रेज़ी मासिक पत्रिका की शुरुआत की, जिसके हिंदी और मलयालम संस्करण भी प्रकाशित होते हैं।
उनकी प्रमुख पुस्तकों में शामिल हैं:
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