माधवदेव

माधवदेव

लेटेकू पुखुरी, नारायणपुर, लखीमपुर, असम (भारत)
लेटेकू पुखुरी, नारायणपुर (असम)

Divine Journey & Teachings

माधवदेव

व्यक्तिगत जीवन

जन्म: मई 1489 
लेटेकू पुखुरी, नारायणपुर (असम)

मृत्यु: 1596 
भेला सत्र, कोच बिहार

सम्मान: महापुरुष के रूप में पूजनीय

धार्मिक जीवन

धर्म: हिन्दू धर्म
दर्शन: वैष्णववाद

धार्मिक करियर

गुरु: श्रीमंत शंकरदेव

परिचय

माधवदेव (मई 1489–1596) एकसरना धर्म के प्रमुख आचार्य थे।

वे अपने गुरु श्रीमंत शंकरदेव के प्रति अटूट भक्ति और अपनी अद्भुत कला प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध थे।

प्रारंभ में वे शक्ति उपासक थे, लेकिन बाद में शंकरदेव के प्रभाव से एकसरना धर्म में दीक्षित होकर उनके प्रमुख शिष्य बने।

1568 में शंकरदेव के निधन के बाद वे उनके धार्मिक और सांस्कृतिक उत्तराधिकारी बने।

जीवन परिचय

माधवदेव का जन्म असम के लखीमपुर जिले में हुआ था।

पिता: गोविंदगिरि भुइयां
माता: मनोरमा

उनका जीवन प्रारंभ से ही कठिनाइयों से भरा रहा।

युद्ध, अकाल और परिस्थितियों के कारण उनका परिवार कई बार स्थान बदलता रहा।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा नारायणपुर में प्राप्त की।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

माधवदेव ने:

  • तंत्र
  • तर्कशास्त्र
  • पुराण

आदि का गहन अध्ययन किया और शक्ति परंपरा में निपुण हो गए।

पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने व्यापार और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ संभालीं।

शंकरदेव से भेंट

जब उनकी माता बीमार हुई, तब उन्होंने देवी को प्रसन्न करने के लिए बलि देने का संकल्प लिया।

लेकिन उनके बहनोई गायापानी (रामदास) ने इसका विरोध किया और उन्हें शंकरदेव से मिलने ले गए।

दोनों के बीच लगभग साढ़े चार घंटे तक चर्चा हुई, जिसके बाद शंकरदेव ने भागवत पुराण का एक श्लोक सुनाया।

इससे प्रभावित होकर माधवदेव ने शंकरदेव को अपना गुरु स्वीकार कर लिया।

यह घटना 1532 में हुई।

संन्यास और भक्ति

गुरु की शिक्षा ग्रहण करने के बाद:

  • उन्होंने विवाह का विचार त्याग दिया
  • अपना जीवन पूर्णतः भक्ति और धर्म प्रचार में समर्पित कर दिया

वे शंकरदेव के प्रमुख शिष्य बने और उनके साथ हर परिस्थिति में रहे।

उत्तराधिकारी

1568 में शंकरदेव के निधन से पहले उन्होंने माधवदेव को अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी नियुक्त किया।

इसके बाद माधवदेव ने धर्म प्रचार और सांस्कृतिक परंपराओं का नेतृत्व किया।

धार्मिक कार्य

अपने कार्यकाल में उन्होंने:

  • वैष्णव धर्म का व्यापक प्रचार किया
  • समाज में भक्ति और समानता का संदेश फैलाया

हालांकि उनके नेतृत्व में कुछ मतभेद भी उत्पन्न हुए, लेकिन उन्होंने अपने मार्ग पर दृढ़ता से कार्य जारी रखा।

साहित्यिक योगदान

माधवदेव एक महान संत-कवि और लेखक थे।

उनकी प्रमुख रचनाएँ:

  • नाम घोषा – भगवान के नाम पर आधारित महान ग्रंथ
  • भक्ति रत्नावली
  • बोरगीत (Borgeet) – लगभग 191 भक्ति गीत
  • झुमुरा (Jhumura) – एकांकी नाटक (9)

अन्य रचनाएँ

  • जन्म रहस्य
  • नाम मालिका
  • रामायण के आदि कांड का असमिया अनुवाद
  • गुरु भोटिमा (शंकरदेव की स्तुति में कविता)

नाटक

  • अर्जुन भंजन
  • चोरधरा
  • पिम्परा गुचोवा
  • भूमि लेतोवा
  • भोजन बिहार

(इनमें से अधिकांश नाटक “झुमुरा” शैली के हैं)

मृत्यु

माधवदेव का निधन 1596 में कोच बिहार के मधुपुर सत्र में हुआ।

Referenc Wikipedia