(करैक्काल अम्मैयार, लगभग 13वीं शताब्दी का चित्र)
करैक्काल अम्मैयार (जन्म नाम: पुणीतवती), जिनका अर्थ है “करैक्काल की पूजनीय माता”, 63 नायनार संतों में शामिल तीन प्रमुख महिला संतों में से एक थीं।
वे प्रारंभिक तमिल साहित्य की महानतम हस्तियों में से एक मानी जाती हैं।
उनका जन्म दक्षिण भारत के करैक्काल में हुआ था और वे संभवतः 5वीं शताब्दी ईस्वी में जीवित थीं।
वे भगवान शिव की महान भक्त थीं।
करैक्काल चोल राज्य का एक प्रमुख समुद्री व्यापारिक नगर था।
अम्मैयार का वास्तविक नाम पुणीतवती था। उनका जन्म धनदत्तन नामक व्यापारी के परिवार में हुआ, जो चेट्टियार समुदाय से संबंधित था।
उनका विवाह नागपट्टिनम के एक धनी व्यापारी परमदत्तन से हुआ था।
करैक्काल में “मंगानी उत्सव” प्रतिवर्ष उनके सम्मान में मनाया जाता है।
करैक्काल अम्मैयार को साहित्य में “अंडाड़ी” शैली का प्रयोग करने वाली पहली ज्ञात कवयित्री माना जाता है।
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं:
इन रचनाओं में भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी भक्ति और समर्पण व्यक्त होता है।
वे भक्ति साहित्य के विकास में अग्रणी संतों में से एक मानी जाती हैं।
कंबोडिया का प्रसिद्ध मंदिर बंतेय स्रेई (Banteay Srei), जो 10वीं शताब्दी का शिव मंदिर है, वहाँ भी करैक्काल अम्मैयार की मूर्ति दर्शाई गई है।
इस मंदिर में:
यह दर्शाता है कि उनकी भक्ति और प्रभाव भारत से बाहर भी फैला।
Reference Wikipedia