गौरकिशोर दास बाबाजी गौड़ीय वैष्णव परंपरा के एक प्रसिद्ध आचार्य और संत थे। उन्हें उनके अनुयायी एक महान महात्मा के रूप में मानते हैं। वे विशेष रूप से भक्ति योग के प्रचार और अपने अनोखे साधु जीवन (अवधूत शैली) के लिए प्रसिद्ध थे।
गौरकिशोर दास बाबाजी का जन्म एक साधारण व्यापारी परिवार में हुआ था।
जब उनकी आयु 29 वर्ष की थी, तब उनकी पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने संसारिक जीवन त्यागकर बाबाजी जीवन अपनाया और पूर्ण रूप से भक्ति मार्ग पर चल पड़े।
उन्होंने गौड़ीय वैष्णव परंपरा में दीक्षा लेकर साधु जीवन शुरू किया और वृंदावन तथा नवद्वीप जैसे पवित्र स्थानों में निवास किया।
गौरकिशोर दास बाबाजी अपने जीवन का अधिकांश समय:
में व्यतीत करते थे।
उनकी साधना अत्यंत गहरी और अनोखी थी, जिसके कारण उन्हें एक अवधूत संत के रूप में भी जाना जाता था।
उनके प्रमुख शिष्यों में एक महत्वपूर्ण नाम है:
उन्होंने गौरकिशोर दास बाबाजी से दीक्षा प्राप्त की और आगे चलकर गौड़ीय वैष्णव परंपरा के महान आचार्य बने।
एक विशेष घटना में, भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने अपने गुरु की तस्वीर के सामने बैठकर स्वयं को संन्यास दीक्षा दी, जो एक असामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
गौरकिशोर दास बाबाजी का निधन 17 नवम्बर 1915 को उनके 77वें जन्मदिन पर हुआ।
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