Shri Eklingji Temple
Shri Eklingji Temple

Udaipur, Rajasthan

Mandir History & Info

🛕 Eklingji Temple (Udaipur) – History 

1. प्राचीन स्थापना

एकलिंगजी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसकी स्थापना 8वीं शताब्दी में मानी जाती है।
इस मंदिर की स्थापना बप्पा रावल द्वारा की गई थी, जो मेवाड़ राज्य के संस्थापक माने जाते हैं।

2. भगवान शिव को समर्पित

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहाँ “एकलिंगजी” के रूप में पूजा जाता है।
• मंदिर में चार मुख वाला शिवलिंग स्थापित है
• यह शिव के चार स्वरूपों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य) का प्रतीक माना जाता है

3. मेवाड़ के शासकों की आराध्य देवता

एकलिंगजी को मेवाड़ के राजाओं की कुलदेवता और राज्य के वास्तविक शासक के रूप में माना जाता था।
• मेवाड़ राजवंश के शासक स्वयं को केवल “दीवान” (सेवक) मानते थे
• राज्य का संचालन भगवान एकलिंगजी के नाम पर किया जाता था

4. पुनर्निर्माण और विस्तार

इतिहास में इस मंदिर को कई बार आक्रमणों के कारण क्षति पहुँची।
• बाद में विभिन्न शासकों, विशेष रूप से महाराणा मोकल और महाराणा कुंभा ने इसका पुनर्निर्माण और विस्तार कराया
• वर्तमान संरचना मुख्यतः 15वीं शताब्दी की है

5. मंदिर परिसर की विशेषता

• एकलिंगजी मंदिर एक विशाल परिसर है जिसमें लगभग 100 से अधिक छोटे मंदिर शामिल हैं
• यह परिसर उदयपुर के पास कैलाशपुरी में स्थित है
• मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी और उत्तर भारतीय शैली का सुंदर मिश्रण है

6. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

• यह मंदिर मेवाड़ की धार्मिक पहचान का केंद्र रहा है
• यहाँ सदियों से पूजा और धार्मिक परंपराएँ निरंतर चल रही हैं
• यह स्थान शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है

7. पूजा और परंपराएँ

• मंदिर में नियमित पूजा, आरती और अभिषेक होते हैं
• विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर यहाँ भव्य आयोजन होता है
• हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर दर्शन के लिए आते हैं

Info

🛕 एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर) – ट्रस्ट विवरण

1. ट्रस्ट / प्रबंधन का नाम

एकलिंगजी मंदिर का प्रबंधन पारंपरिक रूप से मेवाड़ राजपरिवार से जुड़े मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
यह मंदिर किसी सामान्य आधुनिक सार्वजनिक ट्रस्ट के अंतर्गत नहीं आता, बल्कि राजसी परंपरा आधारित प्रबंधन प्रणाली के अनुसार संचालित होता है।

2. प्रबंधन संरचना

• मंदिर का संचालन मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसमें राजपरिवार की प्रमुख भूमिका होती है
• दैनिक पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए पुजारी एवं सेवक नियुक्त किए जाते हैं
• प्रशासनिक कार्यों के लिए एक संगठित व्यवस्था और समिति कार्यरत रहती है

👉 यह प्रणाली पारंपरिक विरासत और आधुनिक प्रबंधन का संतुलित रूप है

3. राजपरिवार की भूमिका

• इस मंदिर की स्थापना बप्पा रावल द्वारा की गई थी
• आज भी मेवाड़ राजपरिवार का इस मंदिर से गहरा धार्मिक संबंध बना हुआ है
• मेवाड़ के शासक स्वयं को भगवान एकलिंगजी का “दीवान” (सेवक) मानते हैं

4. धार्मिक गतिविधियों का संचालन

• मंदिर में प्रतिदिन नियमित पूजा, अभिषेक और आरती होती है
• महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर विशेष आयोजन किए जाते हैं
• सभी धार्मिक अनुष्ठान प्राचीन शैव परंपराओं के अनुसार संपन्न होते हैं

5. आर्थिक प्रबंधन (दान व सेवाएँ)

• मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान दिया जाता है
• इन दानों का उपयोग मंदिर के रखरखाव, पूजा और उत्सवों में किया जाता है
• ट्रस्ट द्वारा वित्तीय प्रबंधन पारंपरिक और व्यवस्थित तरीके से किया जाता है

6. सुविधाएँ और व्यवस्था

• श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की उचित व्यवस्था की गई है
• स्वच्छता, सुरक्षा और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाता है
• मंदिर परिसर में मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं

7. उत्सव और आयोजन

• महाशिवरात्रि मंदिर का प्रमुख उत्सव है
• इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं
• मंदिर ट्रस्ट द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं

8. संपर्क और आधिकारिक जानकारी

• मंदिर का संचालन पारंपरिक व्यवस्था के अंतर्गत होता है
• जानकारी के लिए स्थानीय मंदिर प्रशासन या उदयपुर क्षेत्रीय प्रशासन से संपर्क किया जा सकता है
• इस मंदिर की सामान्यतः कोई स्वतंत्र आधिकारिक वेबसाइट उपलब्ध नहीं होती

Full Address

Kailashpuri, Girwa Tehsil, near the former capital of Mewar, Udaipur, Rajasthan 313202

Managing Trust: Royal tradition-based management system