सांवलियाजी मंदिर का इतिहास अत्यंत रहस्यमय और प्राचीन माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप “सांवलिया सेठ” को समर्पित है, जिनकी पूजा सदियों से इस क्षेत्र में की जाती रही है।
इस मंदिर की सबसे प्रसिद्ध कथा मूर्ति की खोज से जुड़ी है। कहा जाता है कि लगभग 19वीं शताब्दी में भादसोड़ा क्षेत्र में जमीन के भीतर से भगवान श्रीकृष्ण की तीन दिव्य मूर्तियाँ प्राप्त हुई थीं।
👉 यह मूर्तियाँ एक किसान या साधारण ग्रामीण को स्वप्न (Dream) में संकेत मिलने के बाद मिलीं।
मिली हुई तीनों मूर्तियों को अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया गया:
• एक मूर्ति भादसोड़ा (मुख्य सांवलियाजी मंदिर) में
• दूसरी मंडफिया में
• तीसरी अन्य निकटवर्ती स्थान पर स्थापित की गई
👉 इन तीनों स्थानों को आज सांवलिया सेठ के प्रमुख तीर्थ के रूप में माना जाता है।
मूर्ति स्थापना के बाद धीरे-धीरे यहाँ मंदिर का निर्माण किया गया और समय के साथ इसे भव्य स्वरूप दिया गया।
• स्थानीय राजाओं और श्रद्धालुओं ने मंदिर के निर्माण में योगदान दिया
• आधुनिक समय में मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण किया गया
भगवान श्रीकृष्ण यहाँ “सांवलिया सेठ” के रूप में पूजे जाते हैं, जिन्हें धन और समृद्धि देने वाला देवता माना जाता है।
👉 व्यापारियों और भक्तों के बीच यह मान्यता है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर सांवलिया सेठ उनकी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।
मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारिक कथाएँ प्रचलित हैं:
• भक्तों की आर्थिक समस्याएँ दूर होना
• व्यापार में वृद्धि होना
• मनोकामनाओं का पूर्ण होना
इन्हीं मान्यताओं के कारण यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
यह मंदिर राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
• विशेष रूप से व्यापारी वर्ग में इसकी गहरी आस्था है
• हर दिन हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं
आज सांवलियाजी मंदिर एक भव्य और सुव्यवस्थित धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।
• मंदिर का निर्माण पारंपरिक और आधुनिक शैली के मिश्रण में हुआ है
• विशाल प्रांगण, सुंदर सजावट और व्यवस्थाएँ इसे आकर्षक बनाती हैं
सांवलियाजी मंदिर का संचालन “श्री सांवलिया सेठ मंदिर मंडल” द्वारा किया जाता है।
यह एक संगठित और आधिकारिक ट्रस्ट/मंडल है, जो मंदिर की सभी धार्मिक, प्रशासनिक और वित्तीय गतिविधियों का संचालन करता है।
• मंदिर का संचालन एक ट्रस्ट समिति (Temple Trust Committee) द्वारा किया जाता है
• इस समिति में अध्यक्ष, ट्रस्टी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य सदस्य शामिल होते हैं
• धार्मिक कार्यों के लिए पुजारी और सेवायत नियुक्त किए जाते हैं
👉 यह एक सुव्यवस्थित और संगठित प्रबंधन प्रणाली है, जो मंदिर के संचालन को सुचारू बनाती है
• यह मंदिर राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग के अंतर्गत आता है
• सरकार द्वारा ट्रस्ट के कार्यों की निगरानी और नियंत्रण किया जाता है
• पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है
• मंदिर में प्रतिदिन नियमित पूजा, आरती और दर्शन की व्यवस्था होती है
• विशेष अवसरों और त्योहारों पर भव्य आयोजन किए जाते हैं
• भजन, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम ट्रस्ट के निर्देशन में आयोजित होते हैं
• मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दान (Donations) देते हैं
• दान का उपयोग मंदिर के विकास, रखरखाव और धार्मिक कार्यों में किया जाता है
• ट्रस्ट द्वारा वित्तीय प्रबंधन पारदर्शी तरीके से किया जाता है
👉 सांवलिया सेठ मंदिर राजस्थान के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में से एक माना जाता है
• ट्रस्ट द्वारा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्य किए जाते हैं
• जरूरतमंद लोगों की सहायता, भंडारे और सेवा कार्य आयोजित किए जाते हैं
• धार्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाता है
• मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं
• दर्शन, पार्किंग, सुरक्षा और स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था की गई है
• यात्रियों के लिए धर्मशाला और अन्य सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं
• जन्माष्टमी, एकादशी और अन्य प्रमुख पर्वों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं
• बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन आयोजनों में भाग लेते हैं
• मंदिर में सालभर धार्मिक गतिविधियाँ चलती रहती हैं
• मंदिर का आधिकारिक प्रबंधन मंडल (Sanwaliya Seth Mandir Mandal) द्वारा किया जाता है
• श्रद्धालु मंदिर से जुड़ी जानकारी आधिकारिक कार्यालय या स्थानीय प्रशासन से प्राप्त कर सकते हैं
N.H. 76, Chouraha, Dist, Bagund, Bhadsora, Rajasthan 312024
Managing Trust: Sanwaliyaji Temple Bhadsora Trust