गोमुख कुंड मंदिर Chittorgarh Fort के भीतर स्थित एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान मंदिर और जलकुंड (कुंड) दोनों के रूप में प्रसिद्ध है, जहां प्राकृतिक स्रोत से निरंतर जल प्रवाहित होता है।
“गोमुख” का अर्थ होता है “गाय का मुख”।
इस स्थान पर पत्थर की बनी गाय के मुख जैसी आकृति से जल निकलता है, इसलिए इसे “गोमुख कुंड” कहा जाता है।
मान्यता है कि इस कुंड का जल अत्यंत पवित्र और दिव्य है।
यहां स्नान और जल सेवन करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।
यह स्थान साधना और ध्यान के लिए भी अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
गोमुख कुंड का निर्माण चित्तौड़गढ़ किले के निर्माण काल (प्राचीन मेवाड़ काल) से जुड़ा हुआ है।
यह कुंड किले के भीतर जल आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत था, जिससे यहां रहने वाले लोगों और सैनिकों को पानी मिलता था।
कुंड और मंदिर का निर्माण किले के साथ ही किया गया था या बाद में विकसित किया गया।
समय-समय पर इसका संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, जिससे इसकी संरचना आज भी सुरक्षित है।
यह स्थान शिव और अन्य देवी-देवताओं की पूजा से जुड़ा हुआ है।
• भक्त यहां जल अर्पण करते हैं
• ध्यान और साधना के लिए आते हैं
• यह स्थान मोक्ष और शुद्धि का प्रतीक माना जाता है
गोमुख कुंड की संरचना अद्भुत है:
• पत्थर से बनी गाय के मुख से जल प्रवाह
• गहरा और साफ जलकुंड
• आसपास मंदिर और प्राचीन संरचनाएं
• प्राकृतिक और स्थापत्य कला का सुंदर संगम
यहां का जल स्रोत प्राकृतिक है और निरंतर बहता रहता है।
कुंड का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है, जो इसे विशेष बनाता है।
आज गोमुख कुंड चित्तौड़गढ़ किले का एक प्रमुख आकर्षण है।
यहां पर्यटक और श्रद्धालु दोनों आते हैं।
यह स्थान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गोमुख कुंड मंदिर, Chittorgarh Fort एक ऐतिहासिक और संरक्षित स्थल होने के कारण इसका संचालन मुख्यतः Archaeological Survey of India (ASI) द्वारा किया जाता है।
• यह संस्था कुंड और मंदिर दोनों के संरक्षण, रख-रखाव और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।
मंदिर और कुंड का प्रबंधन सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत किया जाता है:
• ASI के अधिकारी और कर्मचारी
• पुरातत्व विशेषज्ञ
• स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा कर्मी
• धार्मिक गतिविधियों के लिए सीमित रूप से स्थानीय पुजारी या साधु मौजूद हो सकते हैं।
प्रबंधन के मुख्य उद्देश्य हैं:
• कुंड और मंदिर की ऐतिहासिक संरचना का संरक्षण
• जल स्रोत की स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखना
• श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करना
• प्राचीन धरोहर को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना
• यह स्थल मुख्यतः एक पवित्र और ऐतिहासिक स्थान के रूप में जाना जाता है
• भक्त यहां जल अर्पण और ध्यान करते हैं
• नियमित बड़े धार्मिक आयोजन सीमित होते हैं
• व्यक्तिगत पूजा और साधना अधिक प्रचलित है
मंदिर/कुंड का संचालन निम्न स्रोतों से होता है:
• भारत सरकार द्वारा आवंटित बजट (ASI)
• पर्यटन से प्राप्त आय (टिकट आदि)
• इन निधियों का उपयोग संरक्षण और सुविधाओं के विकास में किया जाता है।
• ASI के साथ स्थानीय प्रशासन भी सहयोग करता है
• सुरक्षा, सफाई और पर्यटक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है
• स्थल को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित किया गया है
मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निम्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं:
• सुरक्षित दर्शन और भ्रमण व्यवस्था
• सूचना पट्ट (Information Boards)
• सीमित पेयजल और विश्राम सुविधा
• सुरक्षा व्यवस्था
• यह स्थल प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है
• धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है
• पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देता है
• जानकारी ASI या राजस्थान पर्यटन विभाग से प्राप्त की जा सकती है
• स्थल पर सूचना बोर्ड उपलब्ध होते हैं
• ऑनलाइन जानकारी सीमित रूप से उपलब्ध है
VJPV+HRQ, Gaumukh Kund,, Chittorgarh, Rajasthan 312025
Managing Trust: Archaeological Survey of India (ASI)